तुझको चलना होगा

रात को घेर लिया है बादलों ने
चाँद को मगर निकलना होगा
तुझको चलना होगा

संघर्ष जलाकर कुंदन कर देता है
इस मोम के आगे आग को पिघलना होगा
तुझको चलना होगा

दिन को धकेलकर सूरज आगे बढ़ता है
इस शाम के आगे मगर सूरज को ढलना होगा
तुझको चलना होगा

जीवन मंथन में सुर भी हैं असुर भी
अमृतपान के लिए पहले विष निगलना होगा
तुझको चलना होगा

पियूष कौशल

मर्द

ये औरतें घूँघट वूँघट

हिजाब विज़ाब में रहे तो अच्छा है

ये लड़कियाँ ज़्यादा बोले ना

हिसाब विसाब में रहे तो अच्छा है 

ये लक्ष्मीबाई, माँ टेरेसा

किताब विताब में रहे तो अच्छा है

मर्द को ईश्वर मानो, बस मानलो क्यूँकि…

ज़्यादा ना हों सवाल जवाब तो अच्छा है

शर्म है औरत का ही गहना

क़ायम रहे ये नक़ाब तो अच्छा है

बचपन

अपन अभी छोटे हैं अपने लिए हर बात बड़ी है

कोई चिड़िया चहचहा दे कहीं

कोई अपने वाला गाना सुना दे कहीं

अपने को जहां की क्या पड़ी है

अपन अभी छोटे हैं अपने लिए हर बात बड़ी है

कभी जेब में पुराना सिक्का मिल जाए

पुरानी comics कोई अलमारी से निकल आए

छोटी छोटी बातों में बातें बड़ी है

अपन अभी छोटे हैं अपने लिए हर बात बड़ी है

दूध में जलेबी मिला दे कोई

इतवार को पराँठे खिला दे कोई

कोई खाता होगा छप्पन भोग, खाए

अपने को क्या पड़ी है

अपन अभी छोटे हैं अपने लिए हर बात बड़ी है…

मरहम

हर नए ज़ख़्म का मरहम

पुरानी दवाओं में ढूँढो

हर आँधी के सितम

झोंको में, हवाओं में ढूँढो

कुछ चीज़ें दिल से ढूँढने पर ही मिलती हैं

ज़रूरी नहीं हर चीज़ निगाहों से ढूँढो

हवा

पसंद नही आती तुम्हें अब नादानियाँ मेरी

अपने बड़प्पन की कोई दवा तो करो

कई बस्तियाँ वीरान की है इस छोटे दीये ने

आज़मा लो, ज़रा तुम हवा तो करो

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