दुख

ख़ुशी अच्छी है पर….

मुझे दुख भी पसंद है

दुख मैं अपने को किसी से ऊँचा नहीं आंकता

मुझे दूसरों के दुख से ईर्ष्या भी नहीं होती

और जो है उससे बड़े दुख की आशा भी नहीं करता

दुख मुझे प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है

देखा जाए तो ये उतना दुःखद भी नहीं

ख़ुशी अच्छी है पर….

मुझे दुख भी पसंद है

अछूत

अपने ही गुनाहों का सबूत हो गया है

धरती माता का कपूत हो गया है

बाँट दिया जिसने धर्म, जाती, रंग, रूप में सबको

देखो देखो वो इंसान अछूत हो गया है

न कहीं जाने का रहा न मुंह दिखाने का

खुद के ही घर में ताबूत हो गया है

धरे रह गए सभी हथियार-ओ-आविष्कार

एक ही वार में अभिभूत हो गया है

पर आप जनाब

पत्थर मारिए, थूकिए, आप कहां के संविधान में हैं

मुबारक हो आप हिंदुस्तान में हैं

आप कहीं और होते, तो बहुत रोते

मगर मुस्कुराइए की आप हिंदुस्तान में हैं

लात खा कर भी, घात पाकर भी हम फिर खड़े हैं

आप फिर से मासूम बन जाइए, आप हिंदुस्तान में हैं

ये भी बुरा है वो भी, बुराई हाय पूरे जहां में है

पर आप जनाब, मुस्कुराइए

आप हिंदुस्तान में हैं

ढूँढो

ना गिरिजा ना मस्जिद ना शिवाले ढूँढो

पहले भूखों के लिए निवाले ढूँढो

खादी वालों का तो धंधा ही है ये सब

जिसने अपना ही घर जलाया पहले वो मशालें ढूँढो

रोशनी दिखा कर अक्सर लूट लेते हैं लोग

बेहतर ये है की तुम अँधेरो में उजाले ढूँढो

एलान-ऐ-जंग हर बात पर ना किया करो

कुछ नये मसले ढूँढो, कुछ नयी मिसालें ढूँढो

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)