आज कुछ और करते है

अंधेरे सोने नहीं देते, उजाले शोर करते हैं
बांध के रखो शाम की दिलकशी, आज कुछ और करते है

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शख्स

दिल कांच का लेकर, किस किस से तुम टकराओगे
इससे उससे खुद से, किस किस से नजर चुराओगे
वो खुशमिजाज शख्स आईने वाला, गम का दरिया है
नजर मिली तो डुब के मर जाओगे

पियुष कौशल

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मुलाकात

कुछ ऐसे शय और मात हो गई
इक रोज़ उनसे जो मुलाकात हो गई

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