रात भर

तेरे ख्वाब महकते रहे रात भर
मुझे फूल किताबों में मिलते रहे रात भर

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अमा छोड़ो यार…

यूं ही बेसबब बेफिक्र बेहिसाब जिया करो
जहां जिन्दगी का नशा हो जरा झूम के पिया करो

लोग तो परेशान यूं ही रहेंगे हर बात से
इसका अच्छा तो उसका बुरा है, जो मन में आए किया करो

चौखट पे धूप रहने दो, होंठों पे हल्की सी मुस्कान
जहां अंधेरे दिखें, उजाले उड़ा दिया करो

लोगों को आपस में ही करने दो सारी बातें
अमा छोड़ो यार तुम आसमान से बातें किया करो

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हर हर महादेव…

“एक से सौ एक एक
सौ निर्गुण सगुण एक
राम रावण सबके एक
देव कोटि, महादेव एक”

हर हर महादेव…

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वाह रे उपरवाले

पंडित पादरी मौलवी कर रहे धर्म प्रचार
चोर लूटेरे सेवक हैं, नेता पहरेदार
सब जेबें भरन लगे, नोट भयो भरमार
वाह रे उपरवाले तेरी महिमा अपरम पार

पियूष कौशल

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आंच

तुम भी चढ़ाकर देखो अपने से किसी रिश्ते को
मतलब की आंच पर,
हमने अच्छे अच्छों को वहां रंग बदलते देखा है…

                                                               पियूष कौशल

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सुबह

सुबह की पहली किरण ने मेरी आँखें टटोली
कुछ अधूरे सपने अभी भी पलकों पे सो रहे थे
मेरी आँखों ने झूमते हुए बिस्तर को संभाला
उस सिराहने पर ही शायद कोई बादल बरसा था
वो चादर की सलवटें मेरे ख्यालों से रूबरू थीं
कुछ उलझी सी, बेदार सी, बेशर्म सी
आईने में दिख रहा था शख्स वो
वक़्त जिसके बालों में चांदी मल गया था
फिर सोचा यूँ की आज यादों में नहायेंगे जी भर के
वो बक्से जो बंद है सदियों से उनको भी रिहाई देंगे
अपनी आँखों में रख लेंगे मखमल से वो लम्हे
जिन लम्हों की छाँव में आज भी जिंदगी आसान हो जाती है
इक चाय की प्याली तब मेरी नींदों को दस्तक दी
लो मुर्दों का ये काफिला आज फिर से दफ्तर चल दिया

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