आज कुछ और करते है

अंधेरे सोने नहीं देते, उजाले शोर करते हैं
बांध के रखो शाम की दिलकशी, आज कुछ और करते है

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मुलाकात

कुछ ऐसे शय और मात हो गई
इक रोज़ उनसे जो मुलाकात हो गई

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गैट लोस्ट

“गैट लोस्ट” कहा उसने मुझे
खो जाने का भी एक अलग ही मजा है…

पियूष कौशल

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