आवाज

फंसे हुए है लोथड़े कई ख्वाबो के गले में
जिन्दगी के मुंह से अब आवाज नही निकलती

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आज कुछ और करते है

अंधेरे सोने नहीं देते, उजाले शोर करते हैं
बांध के रखो शाम की दिलकशी, आज कुछ और करते है

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