मुलाकात

कुछ ऐसे शय और मात हो गई
इक रोज़ उनसे जो मुलाकात हो गई

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गैट लोस्ट

“गैट लोस्ट” कहा उसने मुझे
खो जाने का भी एक अलग ही मजा है…

पियूष कौशल

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रात भर

तेरे ख्वाब महकते रहे रात भर
मुझे फूल किताबों में मिलते रहे रात भर

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क्यों…

चीथड़े बिखरे पड़े थे मेरी रूह और जिस्म के
वो लोथड़े टटोल कर मेरा मज़हब ढूंढ़ते रहे. ..

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#differently abled

स्टापू खेलते खेलते मस्ती में छपाक से
हड़काते लुढ़काते वक़्त ठेल दिया हमने
दो पैरों वाले को मगर जिन्दगी बोझ लगती है

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